जिन आशियानों को इंसानो ने बनाकर,
कभी संभाला ही नहीं
नेक दिल परमात्मा ने,
बरसात में सारे के सारे धो दिये,
नहीं माना जब मर्द सख्ती से,
कोई बात बीवी की,
हारकर आखिर में बीवी ने,
चंद आंसू पति को चुभो दिये , श
सारे दिन फैलाकर जग में उजियारा,
करके रोशनी,
थकहार कर,
आखिर में उजाले भी सो दिये,
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©vicky
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