कलम की सवारी कर ,
मन मुस्कुराता है..
पन्नौ की राहों पर ,
इमारतों को सजाता है ..
इमारतों के पलायन से ,
भीतर में बाग लगाता है..
ये मन कलम के साथ से ,
बोझ हल्का करता जाता है ..
कलम की लगाम पकड़,
वो आगे बढ़ता जाता है..
ये मन खुद को खाली कर ,
आनंद को सहलाता है..
पन्ने कलम के साथ का आभार वो जताता है..
ये मन कलम की सवारी कर बड़ा ही मुस्कुराता है...
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