परेशान माँ ने डांट दिया तंग होकर
जिन्दगी के कड़वे सच मिल रहे है
चलो आज घुटनों पर शहर घुमा जाये
मेरे दाता ये दुनियाँ कितनी बड़ी है
सारा दिन घूम कर इधर से उधर
आखिर में थककर नींद आ जाती है
आज पहली बार खुद के पैरों पर बाहर आये हैं
जाने कहाँ भाग रहा है सारा शहर
किसी के पास वक्त नही एक पल ठहरने का
घर वापिस चलो माँ को चिंता हो रही होगी
आज व्यस्क हो चूका हूँ
बचपन जवानी बुढ़ापा सब समझ आ रहा है
पड़ोस से किसी बुजुर्ग के मरने की खबर आई
आदमी धरती पर आता है सिर्फ मरने के लिये
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©vicky
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