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कोई चाह नहीं है ✍

पुरी दुनिया को जानने की
कोई चाह नहीं है, बस खुद
को जानना चाहती हूँ,
सब से बेहतर बनने का कोई
इरादा नहीं है, बस सही को
सही ओर गलत को गलत
कह सकु , इतना बेहतर
बनना चाहती हूँ,
सारे सपनें पुरे हो इस बात की
कोई उम्मीद नहीं है, पर कुछ
को तो पंख लगाना चाहती हूँ,
पुरी दुनियाँ की किताबें नहीं
पढ़ ना चाहती , पर जिंदगी को
जिना सिखा दे यैसी कोई किताब
पढना चाहती हूँ॥
पुरी दुनियाँ को जानने की
कोई चाह नहींं है॥
©banirai