कोई गिला शिकवा हमसे अब ना रखना
नये साल में फकत प्यार का जुबां रखना।
रोज़ आएंगी झोंका मेरे साथ गुजारें लम्हों का
सोते वक्त रातों को दरीचा खुला रखना।
बड़े मासूम होंगे वो याद तुम्हारे सपनों में
दिल के कोने में जमाने से छिपा रखना।
हमने अभी तक नहीं सिखा काटना दिन तेरे बिन
कल जब मैं खोलूं आंख कोई नुस्खा बता रखना।
मुझे अब भोजन में पता स्वाद का नहीं चलता
मैं जिंदा रहूं अपने पास मेरे लिए ये दुआ रखना।
तुम जब भी आओ मुझसे मिलने मेरी कब्र पर
एहतराम-ए-उल्फत की एक जलता दिया रखना।
हमसे अलग रह कर जिने का जब कर ली हो फैसला
सच्चाई को सहने का जिगर में जज्बा रखना।
©anuragrahi
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