कोई हालात नहीं ये हालात हैं
तुम बोलती नहीं हो क्या बात है?
भरी महफ़िल में तेरी ये खामोशी
दिल कोई हमसे क्या सवालात है?
न करों याद गाह-गाह का शिकवा
जब तक हूं तभी तक तो मुलाकात है।
ख्वाहिशें भी कभी साथ छोड़ देंगी
यहीं तो जिंदगी की तिलस्मात है।
लोग मुझे बहुत मसरूफ़ जानते हैं
ये ग़म ही तो मेरी जज़्बात है।
क्या करें गर अनुराग शिकायत न करें
हों रही आंशुओं की बरसात है।
©anuragrahi
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