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कोई हस रहा है तो कोई रो रहा है।

कोई हस रहा है तो कोई रो रहा है
हर तरफ विस्मय स्थिति बन रहा है।
कोई किसी के गफलत की ताक में है
हर एक अपना पुराना हिसाब ले रहा है।
लोग उस सत्य से अपरिचित क्यों है
प्रकृति अपना परिधान बदल रहा है।
मानव दुस्साहस की सीमा लांघ चुका है
अपने ही हाथों से सर्वनाश हो रहा है।
कही नाउम्मीदी ने है बिजली गिराई
मैं एक उम्मीद का बिज बो रहा हूँ।
इसी सोंच में अब रहता है अनुराग
ये क्या हो रहा है ये क्यों हो रहा है।
©anuragrahi