Y

कोई रोज़ तो ऐसा गुज़रे, कोई ऐसी शाम सुहानी हो, 'एक कश्ती में तुम और मैं हों, और…

कोई रोज़ तो ऐसा गुज़रे, कोई ऐसी शाम सुहानी हो, 'एक कश्ती में तुम और मैं हों, और नदी का बहता पानी हो।
©your_rohit