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कोई तो हैं...

अब ये शाम ढल जाए,
हर लम्हां तेरी यादों में थम जाए,
मरते तो हम रोज नहीं लेकीन,
देखा हैं जब से, जिएँ हम रोज नहीं।
- निलेश इंगोले
©nilesh2016