मानो भगवान ने बनाया है ,
माँ-बाप ने खिलाया है ।
तो कोन है ये लोग ,
कहाँ से आ गई ये बेड़ियाँ।
आज़ाद थे बचपन से ,
तो क्यों जकड़ गये इन बेड़ियाँ में।
करना कुछ और चाहते हैं
कर कुछ और जाते हैं ।
कोन है ये लोग ,
ये सब हम से करवाते हैं ।
लोग ये कहेंगे लोग वो कहेंगे,
इस के चक्कर में ख़ुद को खो देते है।
और अपनी ही जिंदगी की बागडोर
किसी और के हाथ में दे देते हैं।
लड़ना सब चाहते हैं ,
करना सब चाहते हैं ।
फिर क्यो इतनी मजबूत है ये बेड़ियाँ ?
सब सोच की बात है,
सोच ही तो है ये लोग,
सोच ही तो है ये बेड़ियाँ!!
©k.k
K