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कोरोना

आज रास्ते वेरान है,
गांव की गलियों शांत हे।
कैसा ये "कोहराम " मचा है,
इंसान खुद "केद" है।
जो " शोहरत" ओर "सपनों" के पीछे भाग रहा था,
आज वो अपनों के लिए "दुआ" मांग रहा है।
कुदरत का ही "विनाश" कर दिया,
आज पेड़, पोधे कह रहे,
तुमने किया उसका "अंजाम " है।
कभी दुसरे को निचा दिखानेवाला इंसान,
खुद को बचाने के लिए केद है।
"कोरोना" ने ऐसा है "डराया",
देश आज" एकसाथ "है।
समझ आई अब "गलती",
इस लिए कर रहे लड़ाई।
आज हमें "नाझ" है देश के,
डाक्टर, पोलिस अफसर, ओर सेना के जवानो पर,
"देश" के लिए "कुर्बान" है।
आज न कोई हिन्दू, मुस्लिम, शीख, ओर ईसाई हैं,
सब बोल रहे हम "हिंदुस्तान" है।
आओ साथ मिलकर जंग लडे हम,
फिर से" नया हिंदुस्तान" बनाए हम।
©urvi13