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कोरोना कहर

उदासी का मंजर
कोरोना का खंजर
झेल रहा गांव शहर
कहर पर कहर...।।।
सब कुछ अजीब सा है
न नौकरी है न पैसा है
खाली हो रहा महानगर
थम नहीं रहा असर
भटक रहे लोक दर बदर....
रंग कहीं फीका पड गया है
हंसी में भी जहर घुल गया है
लोग मिलते नहीं एक दूजे से
ये कैसा कोरोना जादू चल गया है
कुछ भी हो नही रहा मुअस्सर
हालात होते जा रहे बद से बदतर...।
कौन सी घडी होगी
फिर से दुनियां खडी होगी
भीड दिखेगी बाजार में
हर तरफ चहल पहल होगी
आँखें तरस ग्ई देखने को सहर
कब शुरू होगा सुहाना सफर
कोरोना का खंजर
झेल रहा गांव शहर
कहर पर कहर......।
©abhidilse