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कोरोना त्रासदी..एक अवलोकन..प्रार्थना

हर तरफ दर्द है दिखती रुसवाई है
कैसी कोरोना की काली बदरी छाई है
किसी को किसी से मिलने नहीं देती
मौत के डर ने लोगों में दूरियां फैलाई है
एक श्वांस की खातिर दर दर भटक रहे लोग
ये कौन सा दुश्मन है ......ये कैसा हरजाई है
कभी कहते थे सर्दी जुकाम है मर्ज मामूली
आज कितनों की इसी ने रूखसत कराई है
कोरोना की दासतां लंबी खिंचती जा रही
दूर दूर तक दिखता कोई नहीं दवाई है
सौ बीमार पर एक अनार है इसका टीका
कमी से जूझ रहे बहुतों की बारी कहां आई है
तूने हीं जिंदगी दी है तू हीं रहमत भी करेगा
तेरे भरोसे हौसला है जीने की हिम्मत पाई है...
©abhidilse