V

कपड़ा

मैं तो यूं ही चला जा रहा था,
गीत मस्ती के गा रहा था,
इक कपड़ों की दुकान मुझे नजर आ गई,
कपड़ों की चांदनी मेरे मन को भा गई,
ग्राहकों की भीड़ में मैं भी घुस गया,
कपड़ों की स्टाल पर मैं भी रुक गया,
गधे की ड्रेस उठाकर मूल्य उसका पूछ लिया,
मुल्य सुनकर पसीना सारा निकल गया,
वह बोला सारा दिन वजन उठाना होगा,
जो मिल जाए वह खाना होगा,
डंडे की मार खानी पड़ेगी,
धूप छांव सब सहनी पड़ेगी,
गधे की ड्रेस वही पर छोड़ दी,
और हाथी की ड्रेस उठा ली,
लगता सारी दुनिया की शक्ति पा ली,
वह बोला 7 गुणा बुद्धि मिल जाएगी,
घास केले खाने पड़ेंगे, राजा करेगा सवारी,
बच्चों को झूले झुलाने पड़ेंगे ,आंखें होगी छोटी तुम्हारी,
होगी आंखों में हल्की सी लाली,
मालिक ही करेगा तेरे दांत/चमड़ी की दलाली,
हाथी को छोड़, कुत्ते की ड्रेस उठा ली,
वह बोला तुझको ईमानदारी दिखानी होगी,
जो डाला है वह खाना होगा,
तुझे रात को भी जागना होगा,
कुत्ते को छोड़ बंदर की ड्रेस उठाई,
उछल कूद कर लूंगा,
जब चाहे जहां चाहे जाऊंगा,
जब चाहे सो जाऊंगा,
पर मन ना माना,
अंतिम ड्रेस देखकर मेरी बांछें खिल गई,
लगता था सारी दुनिया मिल गई,
आवाज आई कि यह सबसे शक्तिशाली है,
ना इसके जैसा कोई बलशाली है,
चाहे तो दुनिया चला सकता है,
यही चाहे तो दुनिया हिला सकता है,
इसके आगे सभी हैं ड्रेस छोटी,
इसकी मदद से कमाऊंगा रोटी,
मैंने उस ड्रेस को उठा लिया ,
आत्मा को मानव का कपड़ा पहना दिया
🌹विकास गर्ग🌹
©vicky