प्रभु कर्मो के सन्यास की राह दिखाई,
निष्काम कर्म की महिमा तुम ने गाई
इन दोनों में जो हो उत्तम उपकारी,
वो बतलाओ मुझको हे कृष्ण मुरारी।
निष्काम कर्म का योग अति सुगम सुन्दर है,
दोनों मार्गो में कुछ भी नहीं अंतर है,
निष्ठा से जो भी व्यक्ति मार्ग अपनाएं,
दोनों ही फलस्वरूप मोक्ष को पाएं,
जो अलग अलग फल समझे वो अभिचारी,
ऐसे बोले अर्जुन से कृष्ण मुरारी।
ये जीव मोह की धारा में बहता है,
माया के द्वारा ज्ञान ढका रहता है,
जब आत्मज्ञान का सत्प्रकाश छाता है,
हे अर्जुन मानव मोक्ष तभी पाता है,
तू ज्ञानदीप से काट निशा अंधियारी,
ऐसे बोले अर्जुन से कृष्ण मुरारी।
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©vikasgarg
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