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कर्म वीर

जो होते हैं कर्म वीर , कभी नही होते अधीर।
जो तपते हैं वनखड़ों में , काल तेज के भुज डंडो में।
न एक पल भी विचलित होते हैं , संकट को करते क्षीर- क्षीर।
©shivatomar