V

कर्मयोग

अर्जुन ने कहा मैं किसको गहूं(मान) , किसको छोड़ू, जिस मार्ग से हो कल्याण मेरा,
उस मार्ग से नाता जोड़ू, जिस मार्ग से हो कल्याण मेरा,
इक ओर कहा तुम युद्ध करो, और कर्म का मार्ग दिखाते हो,
फिर कर्म से बढ़कर हे केशव, तुम ज्ञान को श्रेष्ठ बताते हो,
किसको गहूं(मान) , किसको छोड़ू, जिस मार्ग से हो कल्याण मेरा,
उस मार्ग से नाता जोड़ू, जिस मार्ग से हो कल्याण मेरा,
मुझको कोई भी लगाव नहीं, फिर भी यदि कर्म ना कर पाऊँ,
मानव अनुसरण करें मेरा, मानव हंता कहलाता,
किसको गहूं(मान) , किसको छोड़ू, जिस मार्ग से हो कल्याण मेरा,
उस मार्ग से नाता जोड़ू, जिस मार्ग से हो कल्याण मेरा,
योगेश्वर बोले: तुम मुझे गहो और कर्म करो, उस मार्ग में ही कल्याण तेरा,
तुम ज्ञान से मन को वश में कर लो,
तलवार सी आत्मशक्ति धर लो,
कामरूप पर प्रहार करो,
पहले इसका संहार करो,
हे पार्थ उठो, और कर्म करो, उस मार्ग में ही कल्याण तेरा,
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©vikasgarg