कृषक का ऑशू बादल मे छुप जाये
सन -सन चलती जब हवा ,खेत- खलिहानो मे,
पतझड -सा मच जाये ।
दर्द कृषक से अब सहा न जाये ,
सर्द हवा मे घर से जाये ,
तप्ती धूप मे प्यासा रह जाये ।
फसलो को अपनी ,बच्चो सा सहलाये,
सारा कर सरकार को जाये ।
बेबस और लाचार कृषक, अब सहा न जाये,
कृषक का ऑशू बादल ⛅ मे छुप जाये ।
🔏 संदीप गुप्ता .....
©sgupta
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