कितना प्यारा , कितना सुंदर कितना अद्धभुत रूप है।
ऐसे लगता है मानो की दिनकर की ये तो निर्मल धूप है।
काम- रति को करे पराजित ये जो तेरा रूप है।
वैसे विकट विराट है ये पर भक्तों के अनुरूप है।
©shivatomar
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