मासूमियत की राहों का मुसाफिर बन ,
ईश्वर की नैया का साहिल बन ,
धन्यवाद से तु भर चल ...
सागर के पानी को आंखों में भर ,
हवाओं के स्पर्श को भीतर मे धर ,
कृतज्ञता तु महसूस कर चल ....
कदमों से आगे बढ़कर ,
हाथों से वस्तु स्पर्श कर ,
धरा को नमन कर चल....
तपन में उर्जा भर कर,
शीतलता को सहज कर ,
मौसम की सुंदरता में ,
विनम्र भाव तु प्रकट कर....
मस्तिष्क से सवंर कर ,
खुद की थोड़ी परख कर ,
ईश्वर को हर पहर कर ....
पौधो संग थोड़ा ठहर कर ,
पहाड़ों को भीतर की तरंग कर ,
मासूम कशिश में बह कर
प्रकृति का तु संग कर .....
प्रकृति का तु संग कर.....
©myemotions
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