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कशमकश

भीतर की कशमकश इंसान को रुला देती है...
इस दुनिया के समंदर में उसे डूबा देती है...
वक्त के पहियों पहियों के नीचे उसे दबा देती है...
स्थिर मन में लहरों की गति बढ़ा देती है...
कृत्यों में आलस्य भाव मिला देती है...
इसलिए इस कशमकश की माला को निकाल फैक अपने गले से और ईश्वर की अंगुली थाम ले जो भीतर मे शांति के फूल खिला देती है....
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