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क्षिप्त भ्रमण: रिक्तम् अस्ति

भोगों की शोभा मे
हृदय ने जो फूल रोपा है
वह महज एक धोखा है
घूम घूम कर भोगी बगिया में
भीतर की थकान ने जब जब रोका है
वह ईश्वर प्रदत्त अन्तर्गमन का मौका है
जीवन का क्रम बड़ा ही अनोखा है
अनादिता में सम्पूर्णता से होकर रिक्त
और मिथ्या रिक्त भोग में
करके खुद को क्षिप्त
थककर क्षिप्तता होते हैं विक्षिप्त
विक्षिप्त के दो पहलू में
लिप्त और निर्लिप्त मार्गो का झरोखा हैं
विश्राम करने के चुनावित झरोखे में ही
आता जीवन का झोंका है
एक झरोखे में आया झोंका
तीव्र गतिशील जगत में लगवाता गोता हैं
और अन्य झरोखे में आए झोंके से हृदय शान्तता में सोता है
एक धोखा है
और एक वास्तविकता को जानने का मौका हैं ।।
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