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कसूर

कसूर ना हमारा था
बेगुनाह तुम भी थे
तो कसूर था किसका?
कसूर हमारी शर्तों का था
ना मैंने समझा और
ना ही तुमने कोशिश की
गलत हम दोनों नहीं थे
दोष तो हमारे विचारों का था
जिसमे बस यूं ही बेवजह
उलझते गए लपेटते गए
एक दूसरे पर दोषारोपण
करते गए ,बदनाम होते गए
अपने ही बेहिसाब इश्क़ में
अत्याचार करते रहे।
©anusingh