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कथनी पर करनी फेरात नइखे।

कथनी पर करनी फेरात नइखे
अपनों वचनिया पर लोग खड़ा बुझात नइखे।
दिमाग़ गरम रह ता कबहूं सेरात न बा सन
हर के दुगो बैल कैसे मानत होईह सन
जब एगो बुढ़ी गाय घेरात नइखे।
अपनों वचनिया पर लोग खड़ा बुझात नइखे।
ये दुनिया में बाटे सबके अपन अपन कहानी
केहू लिख के बतावे त केहू कह ता जुबानी
कौन सही कौन ग़लत चेहरा से तनिको पहचान नइखे।
अपनों वचनिया पर लोग खड़ा बुझात नइखे।
हम कइसे चल पाई क़दम क़दम ज़माना के साथ
जब नइखे कौनो डोर न ताकत हमरा हाथ
अब थाकल अंखियां में पहिले जैसन रोशनी नइखे।
अपनों वचनिया पर लोग खड़ा बुझात नइखे।
पहला पधबंद कवि पंडित धरिक्षण मिश्र जी की है।
©anuragrahi