ये कैसा पैग़ाम आया है
जब दादी चीखी चिल्लाई है
मां ने चूड़ी तोड़ी है जब
खबर पिता की आई है
मां तो कहती थी पिता का पैग़ाम पाकर
वो ख़ुशी से झूम जाती है
फिर ये आंसुओं की बाढ क्यों आई है
पिता के पैग़ाम को पाकर
दादी खुश हो जाती थी
फिर पैग़ाम को पढ़कर आंसू क्यों आये है
आप तो कहती थी दादी
खुशियों का पैग़ाम आता है
फिर ये आंसुओं की बारात क्यों आई हैं
देखकर पिता के शव को
बेटी भी चीखी चिल्लाई है
वो पूछती है मां से आप ने तो कहा था
वो खिलौने और खुशियां लाएगे
फिर ये आंसुओं की बारात क्यों आई है
पिता ने कहा था वो आपके लिए लाल साड़ी लाएंगे
फिर सफेद साड़ी क्यों आईं हैं
आपने तो कहा था मां वो खुशियां लाएंगे
फ़िर ये आंसुओं की बारात क्यों आई है
सवाल हजारों थे मन मे
लेकिन उत्तर ना पाए थे
धीरे धीरे थम तो गया आंसुओं का मंजर
फिर आज क्यूं वापस आंसुओं की बारात आई है
आंसुओं से भरी आंखों को देखकर
भाई ने बहन को समझाया
कहीं नहीं गए वो जिंदा हैं
लोगों के लिए शहीद हो गए वो
हमारे लिए अभी भी तारों में जिंदा है।
©shivanii
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