सिर्फ़ चेहरा न देखो,, मैं कुछ और भी हूँ
मुस्कान न देखो चेहरे की,, मैं अंदर से ख़ामोश भी हूँ
न कहो खूबसूरत आँखें हैं मेरी,, ये कुछ और भी हैं
सिर्फ़ खुशियां ही नहीं इनमें,, नमी भी है
चाल देख कर आज़ाद न समझो,, इसमें कुछ राज़ भी है
पायल ही नहीं इनमें,, कुछ बंदिश भी है
मुस्कान देखकर खुश न समझो,, इसमें कुछ फरेब भी है
चेहरे पर तो मुस्कान,, अंदर कुछ दर्द भी है
आवाज धीमी है तो इसमें कुछ ख़ास भी है
बोल दूं हर किसी से मन की बात,तो इसमें कुछ दवाब भी है
न देखो सूरत ये मेरी ,, मैं कुछ और भी हूँ
सीरत से कुछ और,, सूरत से कुछ और ही हूँ...
©shivanii
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