कुछ कहता हु,जो शायद आप लोगो को बुरा लग जाए आज के ही दिन पंडितदीनदयाल जी की हत्या हुआ था,और हम प्रॉमिस डे मना रहे हैं मनाने में बिल्क़ुल बुरा नहीं है,लेकिन अपने संस्कृति को भूलना शायद बुरा है, बुरा ये भी नहीं की हम पश्चिमी जीवन अपना रहे ,समय के साथ बहुत कुछ अपना पड़ता हैं, बल्कि बुरा ये है,कि अपने ही हाथो से अपने सभ्यता का गला घोंट रहे अगर सबके स्टेटस पे आज प्रॉमिस डे का है, तो हम कैसे एक महान व्यक्ति को भूल सकते है,जो हमारे लिए अपनी प्राण की आहुति देने मै भी पीछे नहीं हटे, ये हमारे समाज का अकलमंदी दिखा रहा है,
मेरा इस पोस्ट से किसी को गलत ठहराना नहीं है,मै बस
कुच्छ बुराइयो से अव्गत् कराया हूँ।
उम्मीद करता हु किसी को बुरा न लगे और लगता है तो मै छ्माप्राथि हू।
@Lucky pandey
©luckypande
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