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कुछ लिखने की सोंच ज़ेहन से गानों का नशा चला जाता है एक मर्द के जेब से जब आमदनी…

कुछ लिखने की सोंच ज़ेहन से गानों का नशा चला जाता है

एक मर्द के जेब से जब आमदनी का पैसा चला जाता है

हमने खुद नहीं बनने दिया है म़र्कज मर्ज का अपने बदन को

अब तो छेड़ के मामूली सा बिमारी ऐसा वैसा चला जाता है