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कुछ मिलने का भी निशां रहे मिल कर बिछड़ने का कुछ फुगाॅं रहे यूं तो बहुत बक बक…

कुछ मिलने का भी निशां रहे

मिल कर बिछड़ने का कुछ फुगाॅं रहे

यूं तो बहुत बक बक करते हैं आप

सच बोलने का भी कुछ जुबां रहे

इकट्ठा बारूद क्यूँ कर रही है दुनिया

जब सभी चाहते हैं कायम दो जहाँ रहे

आपने जब साथ मेरा छोड़ा तब पता चला

बहुत दिनों से आप है मेहरबां रहे

मेरे जनाजे मे तो सांप बिछू भी नहीं आएंगे

आप में तो है परम आत्माओं के कारवां रहे।