कुछ नहीं,क्या रखा होता है दयार-ए-यार में
उम्र गुजार दी जाती है फकत इंतजार में
वो रातों को ख्वाब बहुत देखता है
शायद बुरी तरह फंस चुका है किसी के प्यार में
उसे कह दो कि अब भरोसे के लायक नहीं रही दुनिया
दर्द-ए-दिल लेने पड़ जाएंगे बेकार में
बदल गये है मायने अब प्यार,इश्क़,दिल्लगी के
हुस्न आ गया है जबसे खुद बाजार में
उसने पहली दफा कुछ मांगा और मैं दिया नहीं
बग़ावती बू आने लगी थी उनके किरदार में।©anuragrahi