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कुछ तो बात थी उसमे

भोर में,
पंछियो के शोर में
एक अजनबी आया मेरे द्वारे
कुछ अलसाया,कुछ घबराया
पहले तो वो मुझे ना भाया....
ना जाने क्या बात हुई
मै तो उसी के साथ हुई
हर पल रही उसी के ख्यालों में खोई
कुछ तो बात थी उसमे
जो हुई मै उस के बस में
दिखने में था सीधा- सादा
फिर भी लगता कोई शहजा़दा
क्या कहूँ उसकी तारिफ में
नहीं कोई उसके जैसा आज
कि तारिख़ में....
दिल ने तो चाहा था बहुत कुछ
कहना उस को,
पर ये ना था मंजूर किस्मत को
एक दिन अचानक उसका जाना हुआ
मेरा तो सब कुछ खो गया
अब तो एक ही दुआ निकलती है
इबादत में,
खुशियाँ हो हर पल उसके कदमों में
मुझे उससे कोई गिला,शिकवा,शिकायत नहीं
लेकिन अब किसी और कि चाहत भी नहीं
कुछ तो बात थी उसमें
जो हुई मै उसके बस में।
©parinaaz