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कुछ तो बोलो कुछ हमसे बात करों।

कुछ तो बोलो कुछ हमसे बात करों
मुझे तन्हाई से अब तो निजात करों।
तुम्हें मालूम है कि मैं तन्हा रह नहीं सकता
मेरे कुचे में आ जाओ मुलाक़ात करों।
हम चले जाएंगे तुम्हें न ख़बर तक होगी
पुछना है पुछों जो जी चाहे सवालात करों।
लग रही बंदिश जिंदगी के चार-सू मेरे
दिन गुज़रे हैं ग़म में तुम हसीन रात करों।
मयकशी क्यूं बन जाती है गमजदों की जिंदगी
हसिनों! बख्श दो उन्हें कुछ तो खैरात करों।
जा रहा है होकर तेरे दर से ये जनाजा मेरा
एक नज़र देख लो अनुराग का मुकम्मल हयात करों।
©anuragrahi