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कुमकुम सी

बिखेर रही अदभुत छटा
जैसे अम्बर पर काली घटा।
निहारूं मै ऐसे सलोने श्याम को
जैसे कुमकुम सी रंगीन सांझ को।
जगमग सा इनका रूप निराला
कहत सब उनको बांसुरी वाला।
©anusingh