K

कुनुष्का

नाम था उसका महल कुनुष्का,
यादों में वे आती थी ।
यादों में आकर वे,
प्यार मोहबत की बातें समझती थी।
प्यार मोहबत की बातों में वे,
हँसी ठिठोली कर जाती थी।
हँसी ठिठोली करते करते,
हमसे दूर हो जाती थी।
हमसे दूर जाकर वे,
चैन से नहीं रह पाती थी।
हमको वे बहुत याद आती थी,
हमको वे बहुत याद आती थी।
नाम था उसका महल कुनुष्का,
यादों में वे आती थी।
कुंदन कुमार
©kundankuma