V

कुवारां

गली गली में फिरता है बन कर इक बंजारा,
देख कर लोग कहते हैं- आ गया आवारा ,
लगता है कबाड़ जो होता है माँ का दुलारा,
बाप की आंखों में चुभने लगता आंखों का तारा,
दोस्तों के बीच बन जाता है jokes का पिटारा,
पड़ोसियों के लिए बन जाता है मजाक का चारा,
हर जगह शक की निगाहों से देखा जाता है बेचारा,
मोहल्ले में काम आने पर दिखाई देता पहला सहारा,
सब है, पर फिर भी अकेला रहता किस्मत का मारा,
इतना सब होकर भी खुशियाँ फैलाता है कुवारां।
विकास गर्ग
©vicky