क्या बात होंगी
जो घुल जाऊं तुझमें अगर,तो क्या बात होगी,
खुद को ही भूल जाऊं, तो क्या बात होगी…
तू आसमान का चाँद है, मैं एक छोटा सा तारा ही सही,
जो टूटकर बिखर जाऊं, तो क्या बात होगी…
तेरी रोशनी में कहीं खो जाऊं मैं,
अपनी पहचान से भी दूर हो जाऊं मैं,
अगर तेरे इश्क़ में फ़ना हो जाऊं,
तो इससे हसीन और क्या बात होगी…
ना नाम रहे मेरा, ना निशान कोई,
बस तू ही तू हो, और अरमान कोई,
अगर मेरी हर सांस तुझसे जुड़ जाए,
तो ज़िंदगी की यही सौगात होगी…