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क्या करें#1

चारों ओर लालिमा बिखरी है, क्या करें
दिल से करुणा निकली है, क्या करें
महफिलों में भी चुप्पी सी पसरी है, क्या करें
तन्हाईओं में आह सी निकली है, क्या करें
सूरज को जो छू कर आ गए, क्या करें
तपश से फिर भी न जले, क्या करें
सूरज को भी ठंडा कर आये, क्या करें
सारी तपश खुद में समा लाये, क्या करें
मुसाफिर हैं ज़िन्दगी की इस दौड़ में, क्या करें
मुश्किलें भी न हौंसले तोड़ पाई, क्या करें
हम शुरू से ही ऐसे हैं, क्या करें
बुरे हैं यकीनन फिर भी,क्या करें
भाते नहीं किसी को, कड़वे हैं, क्या करें
मरना तो है ही एक दिन, क्या करें
अब जीकर भी न जीये तो और,क्या करें!!!
©deeprichu