हर खुशी तो हासिल नहीं होती, क्या करें
हर ख्वाहिश भी पूरी नहीं होती, क्या करें
जितनी हमारी हुई, उतनी भी सभी की नहीं होती
उस पल को भी जी भर कर न जीयें, तो क्या करें!!!
हर लम्हा इबादत न करें तो, क्या करें
तेरे होकर भी तेरे न रहें, तो क्या करें,
तुझ पर मर कर भी न मर पाएं तो ,क्या करें
जीते भी तुझी में हैं, मरते भी तुझी पे हैं
अब ऐसे में तूही बता हम, क्या करें!!!
©deeprichu
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