अब कोई थाम भी लेगा हाथ तो, क्या करें
वो बात नहीं बनेगी हमसे, क्या करें
कर चुके अपने हिस्से का प्यार हम, क्या करें
अब हमसे भी बस कर्ज ही चुकेगा रिश्तों का,इस में हम भी, क्या करें
समुंदर की लहरों में मोहब्बत की कश्ती है, क्या करें
डूब भी जाये अब कोई खौफ ही नहीं, क्या करें
दुनिया कहती होगी हमें बेकदर, बेहया, क्या करें
अब किसी से कोई फर्क ही नहीं पड़ता, क्या करें
लोग तो जुड़े दिलों को तोड़ते हैं, क्या करें
हम तो पहले से ही टूटे हुए,कोई जल जाए गर छूकर तो, क्या करें!!!!
©deeprichu
D