V

क्या करती है जिंदगी?

हंसाकर फिर से रूलाती है जिंदगी,
रूलाकर फिर से हंसाती है जिंदगी,
आगे बढ़ाकर पीछे ले आती है जिंदगी,
पीछे खींचकर आगे ले जाती है जिंदगी,
अर्श से फर्श पे ले आती है जिंदगी,
फर्श से उठाकर अर्श पर ले जाती है जिंदगी,
सुख के पीछे दु:ख ले आती है जिंदगी,
दु:ख की छांव में सुख ले आती है जिंदगी,
राजा बनाकर रंक बना देती है जिंदगी,
रंक को राजा बना देती है जिंदगी,
कंकड़ को शंकर बना देती है जिंदगी,
दीपक को सूरज बना देती है जिंदगी,
फुलों का बिस्तर दिखाकर कांटों पर लेटा देतीं हैं जिंदगी,
अमृत कहकर विष पिलाती है जिंदगी,
क्या- क्या करती है जिंदगी....
विकास गर्ग
©vicky