जितना प्यार करता मैं तुमसे
तुम शायद नहीं करती उतना
दिल को चीर नहीं जाता देखा
प्यार रवायत में चाहिए दिखना
जो तुम्हें चाहिए वो लाकर देता हूं
फिर भी तेरी शिकायतें क्यूं सुनता हूं
स्वार्थ जहां पलता प्यार की पहुंच नहीं है
प्यार सदा विष पी लेता जानता अमृत नहीं है
प्यार अगर सच करते हो तो स्वार्थ का न दो स्थान
फलेगा फूलेगा प्यार तेरा होगे दुनिया में तुम महान
गिले शिकवे एक दौर प्यार का
छिपा हुआ वो दिख जाता है
मगर हमेशा शक रहना
हर्गिज प्यार को नहीं भाता है
प्यार अगर है साथी से पूरा
सीखो रखना विश्वास
जिस दिन ये टूटता दिखे
मत करना प्यार से आस
हम मानव हैं हम सब की कोई न कोई कमजोरी है
प्यार वो सेतु है जो दो दिलों की पाटता दूरी है
त्याग, समर्पण, विश्वास से पालना है प्यार को
और दिखाना है दुनियां में भारत के संस्कार क़ो
©newera
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