मै हवा हूँ तूफान थोड़ी हूँ,
मैं अकाश हूँ बादल थोड़ी हूँ
आज भी रुकशत रहती हैं,
मेरी समन्दर से...
मैं नदी हूँ ,समन्दर थोड़ी हूँ ।
प्यार से आकर मिलती हूँ,
लहरों में तारंगी हूँ ,सुनामी थोडी हूँ,
हैं गुमान तुम्हें बडे होने का तो रहने दो,
मै छोटे जलाशयों का हिस्सा हूँ ,
बन्दरगाह थोड़ी हूँ ।
©sandeepgup
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