क्या ये सच हे।
हे तो ये
क्यू सच हे।
क्यू हैं ये भेदभाव,
क्यू है सिर्फ तेरे सर पर छत,
क्यू नहि मेरे हिस्से दो पल कि छाऊ।
क्या अमीर और गरीब का अब
सच में बटवारा हो गया?
क्या अब अमीर सरकार को
इस देश में सबसे प्यारा हो गया?
या यू कहदू कि भारत माँ के दो बेटो मे से
एक पराया, और दूसरा न्यारा हो गया।
क्या ये वही देश हे,
जहा अनुच्छेद 370 हटा कर कहा था,
सबको जीने का समान अधिकार
और सब निरंकुश हैं,
कोई उस गरीब से पूछे की वो खुश हे,
या उसके जीवन में लगा अंकुश है।
क्या ये कहना गलत नही के सत्ता के लालच में
तुमने करवाई थी वो चुनावी रैलियां,
क्या यही दिन देखने के लिए
भगत सींग और सुखदेव ने
फांसी चढ़ कर था सब कुछ सेहलिया।
तुम्हें ना तो हैं उन बलिदानों का विचार
और ना हैं उन शहीदो से प्यार
जिन्होंने कभी देश हित के लिए
उठाए थे अपने हथियार।
आज वही शहीदो का परिवार
फिर रहा लाचार ना मिला उन्हें उपचार
और ना मिला उनके हिस्से का प्यार,
बात तो अब ये हो गई के
सियासी इस जंग में पीस रहा सिर्फ गरीब हैं,
अमीरों का क्या हैं, आज ये सरकार है,
तो कल दूसरी उनके करीब है।
©chirag4
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