क्यों पैर आगे बढाने से
पहले ही डर जाते हो,
क्यों दुनियाँ की हार से
इतना घबराते हो,
क्यों खुद से ज्यादा लोगों
की बातों पर विश्वास करते
हो,
क्यों खुद को दुसरों से कम
समझते हो, तुम जैसे भी
हो काफी हो खुद के लिये, फिर
क्यों किसी से उम्मीद करते हो..
क्यों पैर आगे बढाने से डरते हो॥
©banirai
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