जब होना है एक दिन जुदा
हम सब जानते हैं
इस दुनियां मे फिर ईश्वर
दो दिलों को मिलाता क्यों है?
नश्वर काया..नश्वर माया
रात की काली चादर
दिन ओढ सदा सोता आया
बुझा बुझा कर अपनी रौशनी
अगले दिन जलाता क्यों है?
सुख की घडी या दुख की बेला
मानव ने है सब कुछ झेला
जिसके थे कल रोटी के लाले
आज सबको रंग दिखाता क्यों है?
पाप पुण्य इस जहां मे बसता
कोई पाप तो कोई पुण्य से बचता
जिसके हाथ है जो भी लगता
पाप पुण्य का भेद न करता
पाप की गठरी ढोते ढोते भी
पुण्य का स्वांग रचाता क्यों है?
बाहर से जो हैं दया के सागर
भीतर से क्रूर निर्दयी दुराचर
माया की नगरी में बैठा सब को
माया से दूर भगाता क्यों है?
©abhidilse
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