क्यूं हैं काटता तू मुझे क्या लिया तुझसे कुछ माँगा है ,कितना दर्द होता मुझे ये मुर्ख तूने कभी क्या जाना है, तेरे हर साँस पर है मैरा हक क्या मरना तूने ठाणा है,मुझसे शुरू अंत है तेरा मुझसे ही है तेरा बसेरा ,क्यूँ है काटता.............................................................? मैं मर कर भी सहाय कर्ता देना इतना ही बस जाना है ,हर प्राणी का आधार मैं हूं मुझे नहीं पहचाना है,क्यूँ है काटता...........................? सुन्दर स्वच्छ परिवेश रखता ,सबको आनन्दित कर्ता अपनों सा माना है, क्यूं है काटता तू मुझे...............................................................?!
©Parbhat Jh
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