ला पिला दे अब शराब ऐ साकी
कि देखूँ मैं नया ख्वाब ऐ साकी।
नशा चढता नहीं अब जा़म से
हटा ले चेहरे से अपने हिजाब ऐ साकी।
तेरे दर से अब कहाँ जाऊं
है जमाना बहुत खराब ऐ साकी।
तुम मुझे युंहीं आज पिलाती रहो
तुझे होगी बड़ी सवाब ऐ साकी।
और पिने दे मुझे आज खुब पिने दे
कल करेंगे हम हिसाब ऐ साकी।
©anuragrahi
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