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लड़कियों का हाल

आजकल अखबारों में "लड़कियों के साथ बुरा सलूक" के समाचारों से आया भूचाल है
कितना बुरा हमारी देश की लड़कियों का हाल है
बेटे के ना चाहने पर भी मां उसे बाहर जाने को बिना झिझक से कहती है
पर एक बेटी कुछ गलत ना हो जाने के डर से उस घुटन को सहती है
मां डर के कारण अपनी बेटी की बाहर जाने की बात को हर बार देती टाल है
कितना बुरा हमारी देश की लड़कियों का हाल है
आज बेटी अपनों के बीच और अपने ही घर में सुरक्षित नहीं है
कभी जहां पूजी जाती थी नारी क्या यह देश वही है ? अब तो एक पिता ही अपनी बेटी को अकेला देखकर करता उसको बेहाल है
कितना बुरा हमारी देश की लड़कियों का हाल है
जिस पर एक लड़की सबसे ज्यादा भरोसा करती है वो शब्द भाई है
पर दुर्भाग्य से आज उस पवित्र भाई पर भी हवस की भूख छाई है
एक भाई राखी के बंधन को भूल बना रहा अपनी बहन को बेचने का जाल है
कितना बुरा हमारी देश की लड़कियों का हाल है
एक बेटी अपने परिवार को छोड़ अनजाने घर में कहीं स्वपन लेकर आती है
पर कुछ पैसों के भूखे लोग इंसानियत को छोड़ दिखाते राक्षस जाति है
एक लड़की जिंदगी भर सेवा करने का दाम नहीं लेती फिर भी कुछ मूर्ख लोग कहते हैं उसे कंगाल है
कितना बुरा हमारी देश की लड़कियों का हाल है
जब एक लड़की सुबह से शाम तक सबके लिए इतना कुछ करती है
फिर क्यों हर जगह लड़कियों की चीखो से गूंज रही यह धरती है
जब लड़कियां हर दुख से स्वतंत्र होगी ना जाने वो कौन सा साल है
कितना बुरा हमारी देश की लड़कियों का हाल है
कितना बुरा हमारी देश की लड़कियों का हाल है

विनिता
©gopalshyam