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ले न जाए जो मंजिल तक उसे रास्ता नहीं कहते।

ले न जाए जो मंजिल तक उसे रास्ता नहीं कहते
कुछ कदम चलने को चलना नहीं कहते।
मेरे दिल को देखो गैरों को भी कहता है अपना
इक तेरा दिल है अपनों को भी अपना नहीं कहते।
बुजदिली हो सकता है ख़तरनाक समंदर के सफ़र में
दोस्तों' तुफान को हम कभी खतरा नहीं कहते।
बहुतों ने दिल लगाकर हमसे तोड़ लिया रिश्ता
मेरी दरियादिली है जो किसी को हम बेवफा नहीं कहते।
सुना है तेरे शहर-ए-दिल में भी रहती है तिश्नगी
जब जुबां तक न आएं उल्फत-ए-आशना नहीं कहते।
बन जाएं गर बात तो सब कहते है अनुराग वाह वाह
और बात बिगड़ जाए तो लोग क्या क्या नहीं कहते।
©anuragrahi