तुझे छोडने का मन करता हीं नहीं
उम्मीदों का दीया कभी बुझता हीं नहीं
तेरे सितम को हंस हंस कर झेलता रहा
एक भी मौसम अब दुख का आता हीं नहीं
तेरे ईशारे को समझता रहा मंजिल अपनी
बिना तेरे अब कोई भी राह दिखाता हीं नहीं
तेरा ख्याल बिजली बन दौर पडता है बदन में
मुझे तेरे बिन अब एक पल भी रहा जाता हीं नहीं
खुदा का नूर दिखता है तेरी सूरत में हर तरफ
बिन तेरे मुझे अब कुछ भी नजर आता हीं नहीं
काश! जमीं पर कोई होता तुझ जैसा 'एबीकेवी'
और फिर मुझसे यहां एक पल भी रहा जाता नहीं
..।।।।गजल।।...कैसी लगी..विचार जरूर बताना..
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©abykv
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